रेलवे की अनुदान मांगों पर कोरबा क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा उठा, यात्री ट्रेनों और लंबित परियोजनाओं पर सवाल
नई दिल्ली/कोरबा। संसद में रेलवे मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कोरबा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। चर्चा में कहा गया कि रेलवे को देश की जीवन रेखा कहा जाता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में आम यात्रियों की सुविधाओं से ज्यादा माल परिवहन और राजस्व पर जोर दिखाई देता है, जिससे छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कोरबा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया गया कि यह इलाका दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को उसके कुल राजस्व का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा देता है। देश के बड़े हिस्से को कोरबा के कोयले से ऊर्जा मिलती है, लेकिन इसके बावजूद यहां यात्री ट्रेनों की संख्या सीमित है और रेलवे नेटवर्क का बड़ा हिस्सा मालगाड़ियों के संचालन में व्यस्त रहता है। कई बार यात्री ट्रेनों को घंटों तक रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे आम यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
चर्चा के दौरान गेवरा रोड–पेण्ड्रा रोड रेल कॉरिडोर परियोजना में हो रही देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। इस परियोजना का भूमि पूजन वर्ष 2018 में किया गया था, लेकिन वर्ष 2026 तक भी इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। बजट में इस परियोजना को पूरा करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की गई।
कोरबा में बनकर तैयार पिट लाइन को अब तक शुरू नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। कहा गया कि पिट लाइन शुरू होने से ट्रेनों के रखरखाव और संचालन में सुविधा होगी और नई यात्री ट्रेनों की शुरुआत का रास्ता भी साफ होगा।
इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को कोरबा तक विस्तारित करने की मांग भी रखी गई। बताया गया कि नर्मदा एक्सप्रेस (18233–18234), अमृतसर–छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और तिरुपति–बिलासपुर जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें बिलासपुर या इतवारी (नागपुर) तक ही संचालित होती हैं, जबकि इन्हें कोरबा तक बढ़ाने से क्षेत्र के औद्योगिक श्रमिकों, छात्रों और यात्रियों को सीधा लाभ मिल सकता है।
इसके अलावा चाम्पा और सक्ती स्टेशनों पर गीतांजलि एक्सप्रेस और अहमदाबाद एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग भी रखी गई। वहीं कोरबा से कटनी मार्ग पर एक भी सीधी यात्री ट्रेन नहीं होने और कोरबा–राउरकेला रेल लाइन बनने के करीब पांच साल बाद भी वहां केवल मालगाड़ियों के संचालन का मुद्दा भी उठाया गया।
चर्चा के दौरान सरकार से रेलवे योजनाओं में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के यात्रियों को बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।









