कोरबा जिले की कोयले की खदानों से जुड़े कई मुद्दे हैं जिन्हें सांसद ज्योत्सना महंत ने प्रमुखता से उठाया है। इनमें
स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, सड़क, पानी, बिजली, प्रदूषण और पौधारोपण शामिल हैं। आइए इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करें:
*स्वास्थ्य सुविधाएं*
– एसईसीएल के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, जिससे मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पाता।
– प्रदूषण के कारण वायरल बुखार, दांत कड़कना, बाल सफेद होना, खुजली, जलन और सांस की तकलीफ जैसी बीमारियां आम हो गई हैं।
*नौकरी और मुआवजा*
– कोयला खदानों से प्रभावित लोगों को न तो नौकरी मिल पा रही है और न ही मुआवजा।
– कई भूस्थापित गांवों में एसईसीएल ने क्या किया, इसकी कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है।
– ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में खानापूर्ति की जा रही है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है।
*प्रदूषण*
– कोयला खदानों और पावर प्लांट्स से निकलने वाले प्रदूषण ने कोरबा की हवा और पानी को खराब कर दिया है।
– प्रदूषण के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही हैं।
– एसईसीएल प्रबंधन प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
*पौधारोपण*
– वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन धरातल पर कोई परिणाम नहीं दिख रहा है।
*कार्रवाई की मांग*
– सांसद ज्योत्सना महंत ने एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि वे ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करें।
– उन्होंने कुसमुंडा क्षेत्र की महिलाओं के अर्धनग्न प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
– उन्होंने यह भी मांग की है कि जिन लोगों को मुआवजा नहीं दिया गया है या नौकरी नहीं दी गई है, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए। ¹ ²


