KORBA श्री श्याम मित्र मंडल प्रकरण: हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व पदाधिकारियों को नोटिस, 3 दिसंबर तक मूल अभिलेख जमा करने के निर्देश

Must read

श्री श्याम मित्र मंडल प्रकरण: हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व पदाधिकारियों को नोटिस, 3 दिसंबर तक मूल अभिलेख जमा करने के निर्देश

 

 

 

 

 

 

 

श्री श्याम मित्र मंडल, कोरबा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अब बड़ी कार्रवाई सामने आई है। माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर में लंबित प्रकरण WPC 5083/2024 के आदेश दिनांक 11 अप्रैल 2025 के अनुपालन में सहायक रजिस्ट्रार, फ़र्म्स एवं सोसायटीज़, बिलासपुर ने संस्था के पूर्व पदाधिकारियों रोहिणी सुल्तानिया, बिमल मोदी तथा मनोज अग्रवाल को नोटिस जारी किया है।

 

जारी आदेश क्रमांक 4250/30.03.2006/2025 के अनुसार पूर्व अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष को 3 दिसंबर 2025 दोपहर 12:00 बजे तक अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर संस्था के अपने कार्यकाल से संबंधित समस्त मूल अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

किन अभिलेखों को प्रस्तुत करना आवश्यक?

 

सदस्यता पंजी

 

कार्यकारिणी एवं आमसभा अभिलेख

 

कैश-बुक एवं लेज़र-बुक

 

बिल/वाउचर

 

बैंक पासबुक/स्टेटमेंट

 

दान/अनुदान अभिलेख

 

एफडी/चेक रसीदें

 

वेतन/खर्च रजिस्टर

 

संपत्ति अभिलेख

 

Tally Data Backup

 

BRS सहित अन्य वित्तीय व प्रशासनिक रिकॉर्ड

 

 

सहायक रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ सोसायटी पंजीयन अधिनियम, 1973 की धारा 32(1) के अंतर्गत की जा रही है।

 

उठ रहे सवाल: क्या पारदर्शिता पर उठ रहे हैं प्रश्न?

 

महत्वपूर्ण सवाल यह है कि—क्या पूर्व पदाधिकारियों द्वारा समय पर रिकॉर्ड प्रस्तुत न करना संस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है? नोटिस में यह भी संकेत है कि रिकॉर्ड की अनुपलब्धता संस्था के संचालन पर संदेह पैदा करती है।

 

जांच किस स्तर तक जाएगी?

 

रजिस्ट्रार कार्यालय के निर्देशों से यह स्पष्ट है कि यह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि गहन प्रशासनिक एवं वित्तीय जांच की दिशा में उठाया गया कदम है। यदि रिकॉर्ड अधूरा या गलत पाया जाता है, तो आगे बड़ी कार्रवाई संभव है।

 

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, धारा 32(1) के तहत रिकॉर्ड जमा न करने या भ्रामक दस्तावेज प्रस्तुत करने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई तक का प्रावधान है—हालांकि अंतिम निर्णय जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

 

क्या पुराने वित्तीय लेन-देन की सच्चाई सामने आएगी?

 

जांच में बैंक स्टेटमेंट, FD, दान राशि, खर्च और आय-व्यय से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की भी गहन समीक्षा होगी। इससे संभावित अनियमितताओं के खुलासे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

फिलहाल, कोरबा की चर्चित संस्था श्री श्याम मित्र मंडल से जुड़े इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अगली तारीख पर पूर्व पदाधिकारियों की उपस्थिति और प्रस्तुत दस्तावेज ही इस कार्रवाई की आगे की दिशा तय करेंगे।

 

 

 

More articles

Latest article