मनरेगा का नाम बदलना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान – सांसद ज्योत्सना महंत
कटघोरा (कोरबा)।महात्मा गांधी के नाम से जुड़े महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलना राष्ट्रपिता का सीधा अपमान है। यह आरोप कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत जवाली में आयोजित एक दिवसीय धरना प्रदर्शन के दौरान लगाया।
सांसद महंत ने कहा कि देश को आज़ादी दिलाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण गरीबों, किसानों और महिलाओं को रोजगार की कानूनी गारंटी दी थी। मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गांधी जी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने वाला कानून है।
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में मनरेगा को संसद से पारित कर कानून बनाया गया, जिससे करोड़ों ग्रामीणों को सम्मानपूर्वक रोजगार मिला। आज भाजपा सरकार उस कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाकर न सिर्फ उनकी विचारधारा को कमजोर कर रही है, बल्कि गरीबों के अधिकारों पर भी प्रहार कर रही है।
सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा “मोदी की गारंटी” की बात तो करती है, लेकिन कांग्रेस ने जनता को रोजगार की गारंटी दी थी। मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाना केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि आने वाले समय में इस योजना को समाप्त करने की साजिश का संकेत है।
CWC के फैसले पर सड़क पर उतरी कांग्रेस
गौरतलब है कि शनिवार को नई दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में देशभर में आंदोलन करने का निर्णय लिया गया था। उसी निर्णय के तहत जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा ग्रामीण के नेतृत्व में ग्राम जवाली में धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया।
इस धरना प्रदर्शन का नेतृत्व सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने किया। कार्यक्रम में पीसीसी के संयुक्त महामंत्री हरीश परसाई, पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज चौहान, पोषक दास महंत, तनवीर अहमद सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता उपस्थित रहे।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
धरना प्रदर्शन में ग्राम पंचायत जवाली की सरपंच श्रीमती दिलेश कंवर, जनपद सदस्य फूलचंद कश्यप सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मनरेगा का नाम बदलने के फैसले का विरोध करते हुए महात्मा गांधी के नाम को बनाए रखने की मांग की।


