KORBA विद्यालय शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश विषय पर दमोह म. प्र.में राष्ट्रीय स्तर पर 

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विद्यालय शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश विषय पर दमोह म. प्र.में राष्ट्रीय स्तर पर

 

 

10 दिवसीय कार्यशाला के लिए छत्तीसगढ़ से 7 शिक्षक शामिल    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विद्यालयी

 

 

 

 

 

 

शिक्षा में ” हस्त कौशल के समावेश” द्वारा बच्चों के लिए शिक्षण प्रक्रिया को रोचक और सार्थक बनाने के उद्देश्य से सीसीआरटी सांस्कृतिक स्तोत्र एवं प्रशिक्षण केंद्र दमोह मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर पर 10 दिवसीय कार्यशाला 3 से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित की गई। जिसमें सात शिक्षक शिक्षिका छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। गौरतलब हो कि कोरबा जिले से श्रीमती झरना राठौर राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका कन्या शाला उमरेली जिला कोरबा ने राष्ट्रीय स्तर कार्यशाला में शामिल हुई। इस कार्यशाला के दौरान ऐतिहासिक महत्व के स्थान और संग्रहालय का संस्था की ओर से प्रतिभागियों को भ्रमण कराया गया, जहां प्रतिभागी शिक्षकगण भारत के समृद्ध कला एवं संस्कृति से परिचित हुए। प्रशिक्षण कार्यशाला में विभिन्न दिवसों में विविध विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को शिक्षा में कला के महत्व व देश के विभिन्न क्षेत्रों के कला और संस्कृति को समझने व सीखने और उनके संवर्धन की आवश्यकता पर जानकारियां प्रदान की गई। सोशल मीडिया के इस युग में बच्चे हमारी संस्कृति एवं कला से दूर होते जा रहे हैं। इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों तक भारत के सांस्कृतिक विरासत की समझ विकसित करने व उनमें कलाओं के प्रति रूचि जागृत करने में सहायक होंगी

3 से 13 जनवरी तक संचालित इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों के शिक्षक शामिल हुए। कार्यशाला के दौरान ये सभी प्रतिभागी एक दूसरे के संस्कृति सभ्यता कला की समझ स्थापित किए एवं अपने क्षेत्रीय भाषाओं का आदान-प्रदान किए। विदित हो कि विभिन्न राज्यों के हस्तकला से विभिन्न विषयों जैसे गणित ,विज्ञान ,सामाजिक विज्ञान, भाषा, विज्ञान, पर्यावरण आदि को जोड़ने व इन विषयों के सीखने की प्रक्रिया को सरल व सहज बनाता है। हस्तकला में चित्रकला ,मूर्ति कला , काष्ठ कला ,धातु कला आदि व साहित्य ,गीत, संगीत, नाटक जैसे कला रूपों के तत्वों को आत्मसात कराती है जो छात्रों को अपनी रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करने में सक्षम बनाती है ।हस्तकला का उपयोग पारंपरिक रूप से भारत के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में किया जाता है। सीसीआरटी ऐसे हस्तकलाओं के एकीकृत एवं व्यापक प्रशिक्षण प्रदान करता है जिसका उपयोग विभिन्न औपचारिक और गैर औपचारिक शिक्षा पद्धतियों में किया जाता है। कार्यशाला के प्रारंभ में ही कलाओं का शिक्षा में महत्व पर व्याख्यान व प्रायोगिक प्रदर्शन किया गया ।इस कार्यशाला के समापन पश्चात सभी प्रतिभागियों को कला आधारित किट प्रदान किया गया जिसे शिक्षकगण अपने विद्यालय में शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी व रोचक बनाने व बच्चों में कला और संस्कृति के प्रति रुझान पैदा करने के लिए उपयोग कर पाएंगे

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