KORBA मां मड़वारानी धाम की खास परंपरा है कि यहां नवरात्र की पंचमी तिथि को ही पहाड़ों की ऊंचाई पर कलश और जवारा बोया जाता है।

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कोरबा। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर कोरबा-चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित पहाड़ों में मां मड़वारानी का प्रसिद्ध धाम विराजमान है। नवरात्र

 

 

 

 

के पहले दिन से ही जिलेभर में जगह-जगह माता की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं और दुर्गा पंडालों में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया है।

 

 

 

 

 

मां मड़वारानी धाम की खास परंपरा है कि यहां नवरात्र की पंचमी तिथि को ही पहाड़ों की ऊंचाई पर कलश और जवारा बोया जाता है।

 

इतिहासकारों और पुजारी सुरेंद्र कुमार कंवर ने के अनुसार, मान्यता है कि जब मां मड़वारानी का विवाह होना तय हुआ तो उन्होंने शर्त रखी कि विवाह रात में ही संपन्न होना चाहिए। लेकिन समय पर विवाह न हो पाने के कारण मां मड़वारानी पहाड़ों में विलुप्त हो गईं। भगवान शंकर ने उन्हें खोजने का प्रयास किया, लेकिन सफलता न मिलने पर वे कनकेश्वर धाम के नाम से विराजमान हो गए।

 

ग्रामीण परंपरा के अनुसार, मां ने गांववासियों को सपने में दर्शन दिए। जब ग्रामीण पहाड़ पर पहुंचे तो वहां कलमी पेड़ के नीचे जवा और दीया जलता हुआ पाया गया। संयोग से वह दिन नवरात्र की पंचमी तिथि थी। तभी से मां मड़वारानी धाम में पंचमी के दिन ही कलश और जवारा बोने की परंपरा चली आ रही है।

 

नवरात्र के मौके पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेती है।

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