स्कूलों में छात्राओं के लिए उपलब्ध होगा सेनेटरी पैड सुप्रीम कोर्ट का स्वागत योग्य फैसला : निमेश कुमार राठौर अधिवक्ता
कोरबा। सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वच्छता को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है और स्कूलों में मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। यह फैसला 30 जनवरी 2026 को सुनाया गया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे छात्राओं को बिना किसी शुल्क के जैविक रूप से अपघटनीय सेनेटरी पैड उपलब्ध कराएं। यह आदेश जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह छात्राओं का अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ सेनेटरी पैड मिलें। कोर्ट ने कहा छात्राओं को सेनेटरी पैड उपलब्ध न करा पाने पर स्कूल प्रबंधन को दोषी माना जाएगा जिससे उनके स्कूल संचालक का लायसेन्स भी रद्द हो सकता है।
अधिवक्ता निमेश कुमार राठौर ने स्वागत योग्य फैसला बताया।
जिला एवं सत्र न्यायालय कोरबा में प्रैक्टिश कर रहे अधिवक्ता निमेश कुमार राठौर ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को छात्राओं के हित में एक अच्छा कदम बताया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला छात्राओं के हित में एक ऐतिहासिक कदम है। कोर्ट ने कहा है कि मासिक धर्म स्वच्छता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है, और सभी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा ।
अधिवक्ता निमेश कुमार राठौर ने गिनाए फैसले के लाभ ।
कोरबा के अधिवक्ता निमेश कुमार राठौर ने बताया कि इस फैसले से छात्राओं को कई लाभ होंगे, जैसे शिक्षा में बाधा नहीं, मासिक धर्म के दौरान छात्राएं स्कूल नहीं छोड़ेंगी, स्वास्थ्य और स्वच्छता, सैनिटरी पैड के उपयोग से छात्राओं का स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार होगा, छात्राओं को समानता और सम्मान मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं और 3 महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।






