सफाई के नाम पर लाखों खर्च, फिर भी सूखा पड़ा पुराना पहंदा का तालाब
टूटा तटबंध बना ग्रामीणों की मुसीबत, गांव का तालाब बदहाल तो रेलवे फाटक पार कर नहाने जाने को मजबूर लोग — आखिर जिम्मेदार कौन?
कोरबा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत पुराना पहंदा में गांव के बीच स्थित तालाब वर्षों से बदहाली और लापरवाही का शिकार बना हुआ है। कभी ग्रामीणों के निस्तारी, नहाने और दैनिक उपयोग का मुख्य साधन रहा यह तालाब आज सूखे हालात, गंदगी और टूटी व्यवस्था की तस्वीर बन चुका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब की सफाई और सुधार के नाम पर कई बार राशि खर्च की गई, लेकिन धरातल पर उसका कोई असर दिखाई नहीं देता। तालाब का तटबंध वर्षों पहले तोड़ा गया था, लेकिन आज तक उसे दोबारा नहीं बनाया गया। हर बरसात में पानी भरने के बाद पूरा पानी टूटे तटबंध से बहकर निकल जाता है और गर्मी आते-आते तालाब सूखकर मैदान में बदल जाता है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गांव के लोगों, महिलाओं और छोटे बच्चों तक को नहाने और दैनिक उपयोग के लिए रेलवे फाटक पार कर दूसरे मुख्य तालाब तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ट्रेन आने-जाने के दौरान खतरा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है।
गांव के बीच मौजूद तालाब की हालत अब ऐसी हो चुकी है कि वह निस्तारी स्थल कम और कचरा फेंकने की जगह ज्यादा नजर आने लगा है। गांव की नालियों का गंदा पानी भी सीधे तालाब में पहुंच रहा है, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सफाई और सुधार के नाम पर कई बार राशि निकाली जा चुकी है, तो फिर तालाब आज भी बदहाल क्यों है? आखिर तटबंध निर्माण और पानी रोकने की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर मौन क्यों हैं?
अब देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन इस ओर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर ग्रामीणों को इसी तरह बदहाल व्यवस्था और जोखिम के बीच जीवन गुजारना पड़ेगा।


