मां मड़वारानी पहाड़ में आस्था का कठिन सफर, पांच किलोमीटर के रास्ते में अंधेरा; सात साल से दर्शन कर रही महिला ने भी उठाई समस्या
कोरबा–चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित मां मड़वारानी पहाड़ श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। भले ही अधिकांश स्थानों पर शारदीय नवरात्रि समाप्त हो चुकी है, लेकिन यहां पंचमी के दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्रि की शुरुआत होती है। इसी परंपरा के तहत गुरुवार की रात भी पहाड़ पर पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान जारी रहे। माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा।
इसी दौरान कुछ श्रद्धालु उपवास रखकर जमीन पर लेटते हुए, नापते-नापते माता के दरबार तक पहुंचने की कठिन धार्मिक परंपरा निभाते नजर आए। लेकिन रास्ते में अंधेरा होने के कारण उन्हें टॉर्च की रोशनी का सहारा लेना पड़ा। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे लंबे समय से यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं, लेकिन लाइट, पानी और सड़क की समस्याओं से जूझना पड़ता है। वहीं, कोरबा से पहुंची एक महिला ने बताया कि वह पिछले सात वर्षों से माता के दर्शन के लिए आ रही हैं, लेकिन रात में रोशनी की समस्या लगातार बनी हुई है।
मंदिर तक पहुंचने वाले लगभग पांच किलोमीटर के मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें नहीं जलने से श्रद्धालुओं को अंधेरे में सफर करना पड़ रहा है। आसपास जंगल होने के कारण जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
एक ओर भक्त कठिन तपस्या और अटूट विश्वास के साथ माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं, तो दूसरी ओर रोशनी और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्या संबंधित विभाग, प्रशासन और मंदिर समिति इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कराएंगे और श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे? अब देखना होगा कि जिम्मेदारों का ध्यान इस समस्या की ओर कब जाता है।











