₹4.76 करोड़ की पुलिया पर उठे गंभीर सवाल! पहली ही बारिश में धंसी सड़क, पुलिया के किनारे बढ़ा कटाव, बड़े हादसे का खतरा
कोरबा। विकासखंड करतला के सरगबुंदिया–कटबितला मार्ग पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत लगभग ₹4.76 करोड़ की लागत से निर्मित वृहद पुलिया पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुलिया से जुड़ी एप्रोच रोड (पुलिया से जुड़ने वाली सड़क) और शोल्डर (सड़क का किनारा) धंसने लगे हैं। लगातार बारिश के कारण सड़क में दरारें पड़ गई हैं और कई स्थानों पर सड़क करीब 3 से 4 इंच तक खिसककर धंस चुकी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार पुलिया के दोनों ओर मिट्टी का कटाव लगातार बढ़ रहा है। सुरक्षा के लिए स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर ईंट और पत्थर रखकर खतरे का संकेत देने की कोशिश की है, लेकिन संबंधित विभाग अब तक मौके पर नहीं पहुंचा है। न तो तकनीकी जांच कराई गई है और न ही बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
इस मार्ग से प्रतिदिन भारी वाहनों की आवाजाही होती है। वहीं क्षेत्र में रेत के अवैध खनन से जुड़े भारी वाहन भी लगातार इसी रास्ते का उपयोग करते हैं, जिससे सड़क और पुलिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। ऐसे में यदि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा कार्य नहीं किया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सूचना पटल के अनुसार इस पुलिया का निर्माण अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था तथा इसकी संशोधित पूर्णता तिथि दिसंबर 2024 है। निर्माण एजेंसी को पांच वर्षों तक रखरखाव (DLP) की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इसके बावजूद पहली ही बारिश में सड़क धंसने और कटाव जैसी स्थिति निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये की लागत से बने निर्माण की यह हालत पहली ही बारिश में हो गई, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि सड़क पूरी तरह धंस जाती है और कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसका जवाबदेह कौन होगा? ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें और खबरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पीएमजीएसवाई और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर तकनीकी जांच कराएं, सड़क और पुलिया की गुणवत्ता का परीक्षण करें, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा यदि निर्माण में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


