गढ़उपरोड़ा के कदमझरिया आंगनबाड़ी में फर्जी उपस्थिति का आरोप, जर्जर भवन बना अनियमितताओं की आड़?
6 बच्चे मौजूद, रिकॉर्ड में 20 की उपस्थिति दर्ज होने का दावा; छत टपकने और प्लास्टर गिरने से बच्चे नहीं पहुंच रहे, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई
कोरबा। जिले के गढ़उपरोड़ा ग्राम पंचायत अंतर्गत स्थित कदमझरिया आंगनबाड़ी केंद्र एक बार फिर विवादों में है। ग्रामीणों ने केंद्र में बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज करने और शासकीय योजनाओं के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि केंद्र में वास्तविक रूप से जितने बच्चे उपस्थित रहते हैं, उससे कई गुना अधिक संख्या पोषण ट्रैकर और उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज की जा रही है। मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
जर्जर भवन से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बरसात के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है और प्लास्टर भी गिरता रहता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। यही कारण है कि अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को केंद्र भेजने से कतराते हैं। बताया जा रहा है कि बच्चों को किसी अन्य कमरे में पढ़ाने का दावा किया जाता है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इसकी वास्तविक स्थिति की भी जांच होनी चाहिए।
6 बच्चे मौजूद, रिकॉर्ड में 20 की उपस्थिति दर्ज होने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र में कुल 40 बच्चों का पंजीयन है, जिनमें 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 23 बच्चों का नाम दर्ज है। लेकिन प्रतिदिन केवल 5 से 10 बच्चे ही केंद्र पहुंचते हैं। गुरुवार को मौके पर केवल 6 बच्चे मौजूद थे, जबकि रिकॉर्ड में 20 बच्चों की उपस्थिति दर्ज होने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि उस समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी केंद्र में मौजूद नहीं थीं।
पहले भी सामने आए ऐसे आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार, एक दिन पहले भी केंद्र में लगभग 8 से 10 बच्चे ही मौजूद थे, जबकि रिकॉर्ड में 22 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। उनका आरोप है कि यह सिलसिला लंबे समय से जारी है।
पोषण आहार के दुरुपयोग का भी आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक उपस्थिति कम होने के बावजूद अधिक बच्चों की उपस्थिति दर्ज किए जाने से मिड मील/पोषण आहार एवं अन्य शासकीय सामग्री के वितरण में गड़बड़ी की आशंका है। उनका कहना है कि यदि जांच कराई जाए तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इसकी जांच संबंधित विभाग द्वारा किया जाना आवश्यक है।
सुपरवाइजर से संपर्क नहीं हो सका
मामले में संबंधित आंगनबाड़ी सुपरवाइजर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्र के उपस्थिति रजिस्टर, पोषण ट्रैकर, पोषण आहार वितरण रिकॉर्ड तथा भवन की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उपरोक्त समाचार उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।


