कोरबा जिले में कृषकों के लिए उर्वरक का वितरण प्रारंभ

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जिले में कृषकों के लिए उर्वरक का वितरण प्रारंभ

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जिले के किसानों द्वारा खरीफ की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। जिले में इस वर्ष उर्वरक वितरण हेतु 18480 मे.टन का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, तथा वर्तमान में 7504 मे.टन उर्वरक का भंडारण कर दिया गया है। जिले में किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु 19 नवीन सहकारी समितियों का गठन किया गया हैं जिससे जिले में 60 सहकारी समितियों के होने से कृषकों को खाद उठाव में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है।

उप संचालक श्री डी.पी.एस. कंवर के द्वारा सभी उर्वरक विक्रेताओं को खरीफ वर्ष 2026 में सभी वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने एवं कृषकों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में विगत दिनों सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं की बैठक आयोजित कर नियमानुसार उर्वरक का व्यवसाय करने हेतु निर्देश दिया गया है। विभाग द्वारा अनुदानित उर्वरकों यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी, एसएसपी के साथ किसी अन्य सामग्री की टैगिंग प्रतिबंधित की गई है। जिला में निगरानी समिति का गठन कर उर्वरकों की बिक्री पर कड़ी नजर रखते हुये उर्वरकों के अवैध भंडारण, जमाखोरी, कालाबाजारी, अधिक दर आदि के संबंध में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जा रही है।

वैकल्पिक उर्वरकों, नैनो यूरिया एवं डीएपी के साथ-साथ हरी खाद व जैव उर्वरक जैसे नील हरित काई, एजोस्पिरिलियम, पीएसबी इत्यादि केउपयोग को बढ़ावा देने हेतु कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारी की गई है। समितियों हरी खाद के बीज (ढेंचा) का भंडारण प्रारंभ कर दिया गया है। कृषकों से नील हरित काई का उत्पादन कराया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा अनुसार उर्वरक उपयोग संबंधी पोस्टर एवं पाम्पलेट वितरित किए जा रहे हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के स्थान पर वैकल्पिक मिश्रित उर्वरकों का उपयोग करें। जिससे यूरिया की खपत कम होगी तथा फसल को संतुलित पोषक तत्व प्राप्त होंगे। जिले में उर्वरकों की उपलब्धता के दृष्टिगत उप संचालक कृषि, कोरबा द्वारा किसान को सलाह दी गई है कि वह उर्वरकों का अत्यधिक क्रय एवं उनके प्रयोग से बचें तथा निकटस्थ समिति अथवा निजी विक्रय केन्द्रों से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा के अनुसार फसल एवं रकबा के आधार पर उर्वरक का उठाव करें।

 

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