बरीडीह- ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की आपत्ति के बाद रुका सीमांकन कार्य, बैठक के बाद आगे की कार्रवाई होगी
कोरबा, 30 मई 2026। न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार कोरबा के ज्ञापन क्रमांक 601/2026 दिनांक 9 अप्रैल 2026 के परिपालन में गठित राजस्व टीम शनिवार को ग्राम कटबीतला की भूमि सीमांकन के लिए मौके पर पहुंची। विधिवत तामिली के बाद शुरू हुई कार्रवाई को ग्राम कटबीतला एवं बरीडीह के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के चलते रोकना पड़ा। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने भूमि आवंटन और सीमांकन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई।
विरोध बढ़ने पर कोरबा एसडीएम सरोज महिलांगे मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों की बात सुनी। चर्चा के बाद दोनों गांवों के ग्रामीणों, प्रशासन और संबंधित कंपनी प्रतिनिधियों की बैठक कर आगे की कार्ययोजना तय करने पर सहमति बनी।
जनपद सदस्य किशन लाल कोसले का बयान
जनपद सदस्य किशन लाल कोसले ने आरोप लगाया कि Adani Group ग्राम कटबीतला और बरीडीह की लगभग 14 एकड़ शासकीय भूमि पर पौधारोपण के नाम पर सीमांकन करवा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में कथित रूप से फर्जी प्रस्ताव के आधार पर इस भूमि को चिह्नित करने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि यह ग्रामीणों की जमीन पर कब्जे की कोशिश है। प्लांट प्रबंधन द्वारा पूर्व में गांव की सीमावर्ती क्षेत्र पर सैकड़ो पेड़ काटे गए थे और आज वृक्षारोपण की बात कर रहे हैं।
पूर्व जनपद सदस्य नरेंद्र पटेल की आपत्ति
पूर्व जनपद सदस्य नरेंद्र पटेल ने कहा कि ग्रामीणों को पर्याप्त सूचना दिए बिना सीमांकन प्रक्रिया शुरू करना गलत है। उन्होंने मांग की कि पहले सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और ग्रामसभा के समक्ष रखे जाएं, उसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जाए।
युवा नेता आशीष गांगुली का आरोप
युवा नेता आशीष गांगुली ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि देर शाम नोटिस भेजा जाता है और अगले ही दिन सुबह सीमांकन के लिए अधिकारी पहुंच जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को तैयारी का अवसर नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कंपनी के दबाव में कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि जमीन पूर्व में आवंटित होने का दावा किया जा रहा है तो उसके दस्तावेज और ग्रामसभा प्रस्ताव सार्वजनिक किए जाएं।
पूर्व उपसरपंच बुधवार कोसले का बयान
पूर्व उपसरपंच बुधवार कोसले ने आरोप लगाया कि यह तीसरी बार सीमांकन का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को बिना भरोसे में लिए बार-बार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि गांव में इस भूमि को लेकर किसी भी प्रकार का वैध प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का पक्ष
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि का सीमांकन किया जा रहा है, उस पर वर्षों से खेती-किसानी की जा रही है और यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोनों गांवों की संयुक्त बैठक बुलाकर दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाए।
फिलहाल प्रशासन और कंपनी प्रतिनिधि बिना सीमांकन किए मौके से लौट गए हैं। अब सबकी नजर प्रस्तावित बैठक पर टिकी है, जहां इस विवाद का अगला रास्ता तय होगा।


