Korba रक्षाबंधन विशेष: कलाई पर बंधती है राखी, रिश्तों में जुड़ता है विश्वास; जानिए क्यों मनाया जाता है यह पर्व

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रक्षाबंधन विशेष : कलाई पर बंधती है राखी, रिश्ते में जुड़ता है विश्वास; जानिए क्यों मनाया जाता है यह पर्व

 

 

 

 

 

 

 

कोरबा। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सावन पूर्णिमा के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं भाई बहनों की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प लेते हैं। हालांकि बदलते समय के साथ रक्षाबंधन का अर्थ भी व्यापक हुआ है और अब यह भाई-बहन के आपसी प्रेम और जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है।

कलाई पर ही क्यों बांधी जाती है राखी?

राखी को कलाई पर बांधने की परंपरा काफी पुरानी मानी जाती है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में रक्षासूत्र बांधने की प्रथा का उल्लेख मिलता है। कलाई को कर्म और कार्य से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए रक्षासूत्र बांधने का भाव व्यक्ति को शुभ कार्यों और सुरक्षा के संकल्प से जोड़ना माना गया। समय के साथ यही परंपरा भाई-बहन के रिश्ते से विशेष रूप से जुड़ गई।

रक्षाबंधन नाम का क्या अर्थ है?

‘रक्षाबंधन’ दो शब्दों से बना है—रक्षा और बंधन। यानी ऐसा बंधन जो प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करे। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो यह केवल एक धागा नहीं होता, बल्कि उसके प्रति अपने स्नेह और मंगलकामना को व्यक्त करने का माध्यम होता है।

कृष्ण-द्रौपदी की कथा भी है प्रचलित

रक्षाबंधन से जुड़ी भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा सबसे लोकप्रिय पौराणिक प्रसंगों में से एक है। मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपने वस्त्र का टुकड़ा बांध दिया था। इसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का संकल्प निभाया। यह प्रसंग भाई-बहन के रिश्ते की ऐतिहासिक उत्पत्ति का प्रमाण नहीं, बल्कि पौराणिक मान्यता के रूप में जाना जाता है।

राखी केवल भाई की जिम्मेदारी नहीं

आज रक्षाबंधन का संदेश केवल ‘भाई बहन की रक्षा करेगा’ तक सीमित नहीं है। आधुनिक समय में भाई और बहन दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने, सम्मान करने और जरूरत के समय सहयोग देने का संकल्प लेते हैं। यही कारण है कि रक्षाबंधन अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी बन गया है।

मिठाई और उपहार से ज्यादा महत्वपूर्ण है भाव

रक्षाबंधन पर मिठाई, नए कपड़े और उपहार की परंपरा जरूर है, लेकिन इस पर्व का वास्तविक महत्व रिश्ते की भावनाओं में है। कलाई पर बंधा छोटा-सा धागा भाई-बहन को बचपन की यादों और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराता है।

राखी कुछ दिनों में टूट सकती है, लेकिन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का बंधन जीवनभर कायम रह सकता है। यही रक्षाबंधन का सबसे सुंदर संदेश है।

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